देखो न, शिकायत है, अब तुझे भी शायद
देखो न,
अब रूठ गये तुम भी शायद
औझल होने लगे आँखो से तुम भी शायद
शिकायत है, अब तुझे भी शायद
देखो न,
बेपरवाह हसीं फिर रूठ गयी मुझसे शायद
बैठ तुम सब के बीच जिंदगी कही और ढूंढ़ने लगा शायद
तेरी हसीं देख भी मायूस रहने लगा शायद
शिकायत है,अब तुझे भी शायद
देखो न,
तुम सो गयी और मैंने जगाया भी न शायद
तुम रूठ गयी मैंने मनाया भी न शायद
तुम रो गयी मैंने चुप कराया भी न शायद
शिकायत है, अब तुझे भी शायद
देखो न,
तुम हॅस रही और मैं शामिल भी न हूँ शायद
तुम खेल रही मैं देख भी न रहा शायद
तुम सोच रही पर मैं रूठ रहा शायद
शिकायत है, अब तुझे भी शायद
देखो न
इस बार भी तुम रूठ गयी पर शिकायत भी न की शायद
तुम छुप गयी पर ढूंढ़ने को भी न कहा शायद
तुम अब हो पर मैं अनजान रह गया शायद
शिकायत है, अब तुझे भी शायद
देखो न
हर पल मुझसे बात करने की वजह ढूंढा करती थी, अब आँखों से औझल होने पर रो रहा हूँ ये भी न पता तुझे शायद
तुझसे कहनी थी जो बात आज फिर सब उकेरा हूँ पन्नों पे, तुझसे कहने की हिम्मत आज फिर खोया हूँ शायद
शिकायत है, अब तुझे भी शायद
देखो न
तुम औरों से बात कर लेती हो, मैं बस तुझसे कर पाता हूँ शायद
जानता हूँ गलत है, पर तुझे छुपा सिर्फ अपनी दुनियां में बस चाहता हूँ शायद
शिकायत है, अब मुझसे तुझे भी शायद..
देखो न
मैं रूठ गया रोया भी न शायद
मैं भी रूठ गया तुमने मनाया भी न शायद😔😔😊l
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